Sunday, February 22, 2009

कुछ कुछ पागल होते हैं

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प्यार के दीप जलाने वाले कुछ कुछ पागल होते हैं ,
अपनी जान से जाने वाले कुछ कुछ पागल होते हैं ,

हिज्र के गहरे ज़ख्म मिले तो मुझ को ये एहसास हुआ,
पागल को समझाने वाले कुछ कुछ पागल होते हैं,

जान से प्यारे लोगों से भी कुछ कुछ पर्दा लाजिम है,
सारी बात बताने वाले कुछ कुछ पागल होते हैं,

ख्वाबों में भी उनसे मिलन के सपने देखते रहते हैं,
नींदों में मुस्काने वाले कुछ कुछ पागल होते हैं,

इस झूटी नगरी में हमने येही हमेशा देखा है,
सच्ची बात बताने वाले कुछ कुछ पागल होते हैं,

प्यार जिन्हें हो जाये उनको चैन भला कब मिलता है?
सब्र कर अश्क बहाने वाले कुछ कुछ पागल होते हैं

उसके इश्क में भीग के सुनलो हम को ये एहसास हुआ,
दिल की बात में आने वाले कुछ कुछ पागल होते हैं